वो चार पंक्तिया लिख चली गयी

DEVDAS

हमारी कहानी उसके चार पंक्तियों में बंधी नहीं
ख़ुशी, आंसू और कुछ यादों मे कैद नही

अगर जानना ही है मेरे दिल का कारोबार
तो जाओ दुरी बनाओ दुनियादारीसे

आपका  स्इवागत  मेरी मधुशाला से 
यहाँ, जहा मैंने घूंट पिया यादोंसे

आंसुओं की परत मिलेगी हर खाते मे
रस मिलेगा उस हसिना रातोंके हर जाम मे

मधुशाला के कोनो को मत देखो तरंग से
काँच बिखरे नही, यादे सिमटी कोनों से

मधुशाला की भव्यता दिखेगी उसी को
जो चोड आये लाज लाज शर्म उसीको

याहा न मिलेगी परोसने वाली आपको 
घर बनाया था, चोड गयी मधुशाला इसको 

दरवाजे और खिड़कियां खुली थी सारी उसको
किवाड़ और टुटा मकान राह देखता आजभी उसको

प्यार कम न हुवा सुनने वाले
वो चार पंक्तियां लिख चली गयी 

चार दशक कि ये मधुशाला 
निरंतर मधु के खोज मे ठेहर गयी !  

वो चार पंक्तिया लिख चली गयी

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